सही मुस्लिम: २५६૪


٥- عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: إِنَّ اللهَ لَا يَنْظُرُ إِلَى صُوَرِكُمْ وَأَمْوَالِكُمْ، وَلَكِنْ يَنْظُرُ إِلَى قُلُوبِكُمْ وَأَعْمَالِكُمْ.

(صحیح مسلم : ٢٥٦٤)


५- हज़रत अबू हुरैरह रजि० से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : "अल्लाह तआला तुम्हारे जिस्मों और तुम्हारी सूरतों को नहीं देखता, बल्कि वह तुम्हारे दिलों और कर्मों को देखता है।"

(सही मुस्लिम: २५६४)


 फ़ायदा : इस हदीस से भी नेक नीयती और नीयत के सही होने का महत्व स्पष्ट है। इसलिए हर सद कर्म में इसका आयोजन ज़रूरी है और दिल को हर उस चीज़ से साफ़ रखना चाहिए जिससे वह अमल बर्बाद हो सकता है। जैसे दिखावा और नुमाइश की भावना या दुनिया का लालच या और इसी कि़स्म के घटिया कार्य। फिर भी दिलों का हाल चूंकि सिर्फ़ अल्लाह तआला ही जानता है, इसलिए कर्मों की असल हक़ीक़त क़यामत वाले दिन ही स्पष्ट होगी जबकि अल्लाह तआला की बारगाह से अच्छा या बुरा बदला मिलेगा। दुनिया में इंसान के साथ उसके ज़ाहिरी कर्मों के मुताबिक़ ही मामला किया जाएगा और उसकी पोशीदा हालत को अल्लाह के सुपुर्द कर दिया जाएगा।


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मक्तबा मिस्बाहुल इस्लाम अहमदाबाद, गुजरात

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